कानून के रखवाले कानून तोड़ने पर, एक फिर कानून के शिकंजे में फंसे?

गाजियाबाद पुलिस फिर कठघरे में : इलाहाबाद हाईकोर्ट में ACP इंदिरापुरम तलब

गाजियाबाद:-  पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर न्यायपालिका के निशाने पर है। अभी हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक 4 वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में पुलिस की ढुलमुल जांच पर नाराजगी जताते हुए पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया था। यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 सूत्र बताते हैं कि, थाना इंदिरापुरम में दर्ज सोशल मीडिया पर कूट्रचित MMS और आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल कर एक व्यापारी से भयादोहन से जुड़े प्रकरण की जांच में बरती जा रही कथित धांधली को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अधिवक्ता प्रमोद ए. आर. निमेष ने जानकारी देते हुए बताया इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि आरोपों के घेरे में कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि पुलिस विभाग के ही कुछ बड़े अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं, जिन्होंने पहले भी याचिकाकर्ता को फर्जी रेप केस में फंसाकर धारा हटाने के नाम पर 32 लाख रुपये की उगाही की थी और बाद में SIT की जांच में पूरा मुकदमा झूठा पाया गया था।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि पुलिस अपने ही विभाग के लोगों को बचाने के लिए जांच में जानबूझकर धांधली कर रही है और आरोपियों को खुला संरक्षण दे रही है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली और काफी समय बीत जाने के बाद भी जांच में भारी अनियमितताएं पाते हुए ACP इंदिरापुरम और जांच अधिकारी को मूल केस डायरी/पर्चों सहित अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे ये सवाल गाजियाबाद पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि उसे समझ नहीं आ रहा है कि पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के 4.5 महीने बाद भी आरोपियों की पहचान और कोई सकारात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की है।

अपने आदेश दिनांक 28.04.2026 में कोर्ट ने ACP इंदिरापुरम  अभिषेक श्रीवास्तव और जांच अधिकारी इंस्पेक्टर अनिल वर्मा को न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जांच में हुई देरी का कारण बताते हुए व्यक्तिगत शपथपत्र देने के लिए आदेशित किया है।

इस प्रकरण की अगली सुनवाई 6 मई 2026 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में होनी है।

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