नोएडा :- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), गौतम बुद्ध नगर केंद्र सरकार की मजदूर, किसान एवं आमजन विरोधी तथा कॉर्पोरेट परस्त नीतियों के खिलाफ आज दिल्ली के रामलीला मैदान में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) द्वारा आयोजित विशाल जन आक्रोश रैली ने ऐतिहासिक स्वरूप ग्रहण किया। लाखों की अभूतपूर्व भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि देश की जनता अब अन्यायपूर्ण नीतियों को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
गौतम बुद्ध नगर (नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा) से माकपा जिला सचिव कॉमरेड रामसागर के नेतृत्व में हजारों मजदूरों, किसानों और महिलाओं ने जोशीले अंदाज में रैली में हिस्सा लिया। इस दौरान सीटू के नेता मुकेश कुमार राघव, गंगेश्वर दत्त शर्मा, रामस्वारथ, रामकिशन सिंह, टीकम सिंह, पिंटू, छोटू, रामाशीष, नरेंद्र पांडे, धर्मपाल चौहान, राजकरण सिंह, भरत डेंजर, जनवादी महिला समिति की नेता रेखा चौहान, गुड़िया देवी, आशा यादव, किरण देवी, ममता तथा किसान सभा के नेता डॉ. रुपेश वर्मा, वीर सिंह नागर, अजय पाल भाटी आदि के नेतृत्व में बड़ी संख्या में जनसमूह शामिल हुआ।
रैली को संबोधित करते हुए माकपा के राष्ट्रीय महासचिव कॉमरेड एम. ए. बेबी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा नीतियां देश के मजदूरों, किसानों और आम जनता को हाशिए पर धकेलने का काम कर रही हैं, जबकि कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि इस जनविरोधी नीति ढांचे के खिलाफ व्यापक जनसंघर्ष को और तेज किया जाएगा।
सीटू गौतम बुद्ध नगर के जिला सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा ने बताया कि रैली में चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स), बीज विधेयक, बिजली संशोधन विधेयक तथा मनरेगा में किए गए बदलावों को तत्काल निरस्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। उन्होंने कहा कि ये नीतियां सीधे-सीधे मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर हमला हैं।
माकपा जिला सचिव कॉमरेड रामसागर ने रैली की ऐतिहासिक सफलता के लिए सभी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जनसैलाब आने वाले बड़े संघर्षों की भूमिका तैयार कर चुका है।
किसान सभा के नेता डॉ. रुपेश वर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह रैली सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि निर्णायक बदलाव का संकेत है। यदि सरकार अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करती है तो देश की जनता उसे सत्ता से हटाने का काम करेगी।
यह जन आक्रोश रैली देशभर में एक मजबूत संदेश देती है कि मजदूर, किसान और आम जनता अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष करने के लिए तैयार हैं।
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