8 साल बाद भी इंसाफ नहीं: अवार्ड की 46 करोड़ की राशि दबाए बैठा प्रशासन, 1 अप्रैल से परिवार सहित आमरण धरने पर बैठेंगे सफाई कामगार "सीटू"
8 साल बाद भी इंसाफ नहीं: अवार्ड की 46 करोड़ की राशि दबाए बैठा प्रशासन, 1 अप्रैल से परिवार सहित आमरण धरने पर बैठेंगे सफाई कामगार "सीटू"
ग्रेटर नोएडा के माली और सफाई कामगारों का सब्र अब जवाब दे गया है।
माननीय औद्योगिक न्यायाधिकरण-5, मेरठ द्वारा दिनांक 29.05.2018 को पारित अवार्ड को उच्च न्यायालय इलाहाबाद और सर्वोच्च न्यायालय तक ने बरकरार रखा, मगर 8 साल बीत जाने के बाद भी श्रमिकों को उनका हक नहीं मिला।
सहायक श्रमायुक्त के आदेश (04.01.2024) पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से वसूली गई 46 करोड़ 36 लाख 80 हजार रुपये की राशि 7 अगस्त और 1 सितंबर 2025 को अपर श्रमायुक्त कार्यालय, गौतमबुद्ध नगर में जमा हो चुकी है। श्रमिकों ने 19 सितंबर 2025 को सभी दस्तावेज और फोटो सहित भुगतान का आवेदन भी दिया, लेकिन आज तक एक रुपया भी वितरित नहीं किया गया।
यूनियन प्रतिनिधि रामकिशन सिंह, टीकम सिंह सीटू नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा का कहना है — "हम कोर्ट-कचहरी की हर लड़ाई जीत चुके हैं, पैसा सरकारी खजाने में जमा है, फिर भी हमारे बच्चे भूखे हैं। यह न्याय का मज़ाक है।"
अंतिम चेतावनी:
बार-बार गुहार के बावजूद सुनवाई न होने पर यूनियन ने ऐलान किया है कि 1 अप्रैल 2026 से अपर श्रमायुक्त कार्यालय, जी-25ए, सेक्टर-3, नोएडा के सामने संबंधित श्रमिक अपने परिवार, महिलाओं और बच्चों सहित अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। धरना रात-दिन चलेगा।
धरनास्थल पर माइक, टेंट, स्वच्छ पेयजल, मोबाइल शौचालय तथा बच्चों-महिलाओं के लिए भोजन की व्यवस्था यूनियन स्वयं करेगी। आंदोलन को जनसमर्थन दिलाने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।
यूनियन ने अपर श्रमायुक्त से माँग की है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए अविलंब अवार्ड का पालन कराया जाए और जमा राशि श्रमिकों को वितरित की जाए, अन्यथा उत्पन्न स्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
भवदीय,
हेम सिंह, महेश कुमार, राम किशन, इन्द्रपाल, फिरेराम
(चुने हुए प्रतिनिधि)
ग्रेटर नोएडा माली एवं सफाई कामगार यूनियन (सीटू)
234, लाल झंडा भवन, अम्बेडकर रोड, गाजियाबाद
धरना प्रदर्शन की सूचना की प्रतिलिपि: रजिस्ट्रार (उच्च न्यायालय इलाहाबाद), मुख्यमंत्री (उ.प्र.), प्रमुख सचिव (श्रम), श्रम आयुक्त (उ.प्र.), जिलाधिकारी व पुलिस आयुक्त (गौतमबुद्ध नगर), सीटू उ.प्र. व दिल्ली राज्य कमेटी, जिला अभिसूचना अधिकारी (गौतमबुद्ध नगर) को भी भेजी गई है।
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