प्रबंधक हो गए मस्त, मजदूर हो गए पस्त, भारतीय मजदूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष:-भारत भूषण शाही
Ghaziabad :-श्रम मंत्रालय एवं श्रम विभाग की उदासीनता के कारण निजी कंपनियों में कार्यरत श्रमिकों की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। विभागीय निष्क्रियता का लाभ उठाकर कंपनी प्रबंधन मनमानी पर उतर आया है, जिससे प्रबंधक वर्ग तो मस्त है, लेकिन मजदूर वर्ग पूरी तरह पस्त होता जा रहा है।
कंपनियों में श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। प्रबंधन द्वारा की जा रही क्रूर एवं अमानवीय कार्यवाहियों के कारण श्रमिक अपने परिवार का भरण-पोषण तक ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। श्रमिकों के अधिकारों का हनन आम बात हो गई है।
श्रम कानूनों के उल्लंघन के विरुद्ध जब श्रमिक प्रतिनिधि आवाज उठाते हैं और वैधानिक कार्यवाही की मांग करते हैं, तो कंपनी प्रबंधन उनके साथ दुर्व्यवहार एवं अनुचित व्यवहार करता है। शिकायत करने वाले श्रमिकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, जिससे उनका कंपनी में कार्य करना दूभर हो जाता है।
यह भी देखा जा रहा है कि जो श्रमिक प्रबंधन के खिलाफ किसी भी प्रकार की शिकायत करता है, उसके लिए कंपनी में सम्मानजनक ढंग से जीवन यापन करना कठिन हो जाता है और उसे अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
भारतीय मजदूर यूनियन श्रम मंत्रालय एवं श्रम विभाग से मांग करती है कि वे इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लें और श्रमिकों के हितों की रक्षा हेतु सख्त एवं प्रभावी कार्यवाही करें, ताकि मजदूरों को उनका वैधानिक अधिकार मिल सके और उन्हें शोषण से मुक्ति मिले।