आई.टी.एस स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, गाजियाबाद में 10वाँ बिज़नेस समिट का आयोजन
Ghaziabad :- आई.टी.एस स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, गाजियाबाद में "बिजनेस रीमेजिन्ड: लीडिंग विथ पर्पस, पावर्ड बाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" विषय पर 10वाँ बिज़नेस समिट 2026 का सफल आयोजन 21 फरवरी 2026 को प्रातः 10 बजे से किया गया। जिसका मुख्य केंद्र बिंदु था कि किस प्रकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व्यवसायों को परिवर्तित कर रहा है, साथ ही नैतिक नेतृत्व और उद्देश्य-आधारित रणनीतियों को बनाए रख रहा है।
समिट के चैनल पार्टनर बिजनेस स्टैंडर्ड थे, जो भारत का प्रमुख व्यवसायिक दैनिक समाचार पत्र है।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि कुमार विनीत
विशेष सचिव, युवा कल्याण एवं खेल विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार, श्री यशोवर्धन झा आजाद
सेवानिवृत्त आई पी एस, पूर्व विशेष निदेशक आई वी, पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त, मिस मनीषा गर्ग,
पार्टनर एवं हेड – मैनेज्ड सर्विसेज, के एम पी जी इंडिया, आई. टी. एस.
– द एजुकेशन ग्रुप के वाइस चेयरमैन श्री अर्पित चड्ढा, निदेशक डॉ अजय कुमार एवं चेयर पर्सन
– एक्रीडेशन & रिसर्च डॉ अनुषा अग्रवाल द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ शुभारंभ किया गया।
प्रो. (डॉ.) अजय कुमार ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि ए आई स्वास्थ्य, इन्वेंट्री मैनेजमेंट, और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन ला रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल ऑटोमेशन नहीं, बल्कि व्यवसायों को पुनः परिभाषित करने का माध्यम है। उनका मत था कि सफल प्रबंधन संस्थानों को एआई और मानवीय बुद्धिमत्ता के साथ समन्वित करना होगा, ताकि लाभप्रदता, स्थिरता और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि एआई मनुष्य का स्थान नहीं लेता, बल्कि उसे सशक्त बनाता है।
डॉ. अनुषा अग्रवाल ने समिट की रूपरेखा प्रस्तुत की और विषय के पीछे की दृष्टि को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी की सोच और कार्यप्रणाली एआई से प्रभावित है।
उन्होंने बताया कि समिट दो पैनल में चर्चा आयोजित की जाएगी। प्रथम सत्र में
एआई आधारित नेतृत्व एवं कार्य-परिवर्तन और द्वितीय सत्र एआई युग में नैतिक निर्णय एवं मानवीय बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विस्तार से परिचर्चा की गई।
उन्होंने मानव-केंद्रित विकास, सतत सीखने और प्रतिस्पर्धात्मकता की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री अर्पित चड्ढा ने अपने संबोधन कहा कि वास्तविक शिक्षा अनुभव और संवाद से आती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि आज ए आई वित्तीय निर्णयों में भी मार्गदर्शक बन रहा है।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि व्यवसाय केवल लाभ कमाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के लिए सार्थक समाधान देने का साधन है। उन्होंने आत्म-प्रतिस्पर्धा, निरंतर सुधार और प्रश्न पूछने की आदत विकसित करने की सलाह दी। आई.टी. एस.- द एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन डॉ आर पी चड्ढा ने इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी प्रतिभागियों के प्रति अपनी शुभकामनाएं दी।
श्री कुमार विनीत ने
तकनीकी परिवर्तन की तुलना वाईटूके काल से करते हुए कहा कि तकनीक बदलती है, पर मानव की भूमिका समाप्त नहीं होती।
एआई मानव क्षमताओं को बढ़ाता है, प्रतिस्थापित नहीं करता।
दूरदर्शिता, नैतिकता और सहयोग आधुनिक प्रबंधन की आधारशिला हैं।
आत्मविश्वास, संचार कौशल और सांस्कृतिक गौरव नेतृत्व के लिए अनिवार्य हैं।
श्री यशोवर्धन झा आज़ाद ने अपने व्यक्तव्य में
राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और शासन में महत्व को रेखांकित किया तथा एआई
विकास के लिए पैमाना, विश्वसनीयता और संप्रभुता पर बल दिया और बताया कि
भारत को चिप्स और डेटा अवसंरचना में आत्मनिर्भर बनना होगा।
व्यवसायों को एआई क्षमता, डेटा सुरक्षा और कुशल पेशेवरों में निवेश करना चाहिए।
सुश्री मनीषा गर्ग ने
बताया कि एआई नौकरियाँ समाप्त नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें पुनःडिज़ाइन कर रहा है।
कौशल विकास नौकरी की तुलना में तेजी से प्रासंगिक हो रहे हैं और इसलिए निरंतर सीखना आवश्यक है।
एआई उपकरणों का समझदारी से उपयोग करते हुए संचार, नेतृत्व और विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करनी चाहिए।
उद्घाटन सत्र का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस उद्घाटन सत्र ने समिट की मजबूत नींव रखी और प्रतिभागियों को उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व के साथ एआई आधारित नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित किया।
यह समिट विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार, नैतिक और तकनीकी रूप से सक्षम नेतृत्व विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।
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