ट्रंप की दादागिरी:- सिकंदर यादव
Ghaziabad :- अमेरिका के राष्ट्रपति खुद को शांति का दूत बताते हैं, और अपने लिए नोबेल पुरस्कार की मांग करते हैं, साथ ही वो दावा करते हैं कि दुनिया में युद्ध रुकवाने में उनकी भूमिका रहती है परंतु पिछले दिनों जिस प्रकार वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति का अपहरण करके उन्हें जेल में डाला गया, उससे उनके मंसूबे सारी दुनिया के सामने एक्सपोज हो गए, इससे सिद्ध हो गया कि ट्रंप की सोच विस्तारवादी है, वो ताकत के बल पर देश की सीमाएं बदलकर अपना प्रभुत्व जमाना चाहते हैं, एक तरफ अमेरिका लोकतंत्र की व मानव अधिकार के बात उठाते, वहीं दूसरी ओर एक देश के राष्ट्रपति का अपहरण करके उस पर मुकदमा चलाते हैं, दो देशों में युद्ध होते हैं तो भी युद्धबंदियों के अधिकार अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत लागू होते हैं, लेकिन ट्रंप ने जिस प्रकार एक वर्तमान राष्ट्रपति व उनकी पत्नी के साथ एक साधारण कैदी जैसा व्यवहार किया वो कहीं भी यूनाइटेड नेशन के तहत सही नहीं है.
उल्टा इससे तो ऐसा लगता है कि यूनाइटेड नेशन की उपयोगिता समाप्त हो चुकी है जिस तरह की मिसाल डोनाल्ड ट्रंप पेश कर रहे हैं इसका एक ही संदेश है जो ताकतवर है उसकी सभी बात सही है ये दुनिया को 500 वर्ष पीछे ले जाने वाला जंगल का कानून है, जहां पर ताकतवर का हर कदम सही ठहराया जाता है, सारी दुनिया को मिलकर, साथ ही अमेरिकी नागरिकों को भी इसका विरोध करना चाहिए क्योंकि यह निर्णय सबके लिए घातक होगा जो भी देश ताकतवर होगा वो दूसरे देश पर बलपूर्वक कब्जा कर लेगा, इससे दुनिया कबीलाई समय में पहुंच जाएगी जहां पर लोकतंत्र में मानव अधिकार की कोई कीमत नहीं रह जाएगी, ये दूसरा विषय है की मादुरो एक तानाशाह है, लेकिन उसे हटाने का अधिकार वेनेजुएला की जनता के पास है ना कि ट्रंप के पास, अतः विश्व कल्याण में तुरंत मादुरो को वेनेज़ुएला भेजा जाना चाहिए।
Comments
Post a Comment