गाज़ियाबाद, हिंदी भवन समिति, गाज़ियाबाद द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का लोगों ने चार घन्टे आनंद लिया।
दिनेश चंद गर्ग प्रेक्षागृह, हिंदी भवन, लोहिया नगर में आयोजित कार्यक्रम दोपहर साढ़े तीन बजे से रात 8 बजे तक चला। जिसमें नगर के तमाम साहित्य प्रेमियों ने कार्यक्रम में शामिल होकर प्रत्येक अच्छी पंक्ति पर खुल कर दाद दी। देश के प्रख्यात कवियों और शायरों ने अपनी कविताओं और ग़ज़लों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर के रखा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुप्रसिद्ध शायर विजेंद्र सिंह परवाज हर बार की तरह इस बार भी खूब जमे। इस ग़ज़ल पर उन्हें खूब वाह वाही मिली-
ये जिंदगी भी कैसे बहाने में कट गई
जैसा नहीं हूं वैसा दिखाने में कट गई
अपनी हदों में रहकर बहलना ही ठीक था
मेरी पतंग ऊंचा उड़ाने में कट गई
दिल्ली से पधारे हास्य कवि अनिल अग्रवंशी की गंभीर बातों को भी लोगों ने खूब मन से सुना-
कुछ रिश्ते जीवन में बहुत जरूरी हैं
कुछ के साथ निभाना एक मजबूरी है
कुछ रहकर भी दूर सदा दिल में रहते
कुछ मिलते हैं रोज मगर एक दूरी है
कवि सम्मेलन व मुशायरे का संचालन कर रहे शायर राज कौशिक के ये अशआर बहुत पसंद किए गए-
नहीं मुमकिन कि जो भी है सभी अपना वो हो जाए
करो कोशिश जो अपने पास है बस वो न खो जाए
गरीबी में ये आशा है कि अच्छा वक्त आएगा
अमीरी खौफ लाती है बुरा कुछ अब न हो जाए
अंजू जैन को इन पंक्तियों पर खूब वाह वाह मिली-
अजब हैं मायने इस दौर की गूंगी तरक्की के
हंसी बेजान सी लब पर बदन टूटे थकानों में
डॉ. नवाज़ देवबंदी, नईम अख़्तर, हिमांशी बाबरा, आलोक यादव और डॉ. नदीम शाद को भी लोगों ने जमकर दाद दी। हिंदी भवन समिति के अध्यक्ष ललित जायसवाल, महासचिव सुभाष गर्ग, कोषाध्यक्ष योगेश गर्ग, सदस्य अरुण, डॉ लाल रतनांकर, तूलिका सेठ आदि ने रचनाकारों का स्वागत किया। मुख्य अतिथि जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह, विशेष अतिथि पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी व पूर्व मेयर आशु वर्मा ने भी विचार व्यक्त किए।
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