प्रदेश के पहले दिव्यांग बच्चों के पार्क को बचाने के लिए इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन की मुख्यमंत्री से अपील
गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम में स्थित उत्तर प्रदेश के पहले ‘दिव्यांग पार्क’ के अस्तित्व पर उठे सवालों ने अब एक गंभीर और संवेदनशील चर्चा को जन्म दे दिया है। वर्ष 2020 में माननीय केंद्रीय मंत्री जनरल वी.के. सिंह द्वारा उद्घाटित यह विशेष पार्क हजारों दिव्यांग बच्चों के शारीरिक, मानसिक उपचार (थेरेपी) और गरिमापूर्ण जीवन का एकमात्र सहारा रहा है। पार्क के सौंदर्यीकरण एवं बोटिंग प्रोजेक्ट की योजना के बीच, जीआरएपी-4 की पाबंदियों के दौरान जिस प्रकार 19 दिसंबर की रात को पार्क को खोदने की कार्रवाई की गई, उसने दिव्यांग बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और भविष्य को लेकर अभिभावकों में गहरी चिंता और रोष व्याप्त है। आईपीए की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा त्यागी का कहना है कि विकास की कोई भी योजना इन दिव्यांग बच्चों के एकमात्र सुरक्षित एवं अनुकूल स्थान की कीमत पर स्वीकार्य नहीं हो सकती।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, अभिभावकों ने शनिवार, 20 दिसंबर को जीडीए सचिव श्री राजेश कुमार सिंह (आईएएस) से भेंट कर अपनी आपत्तियाँ और चिंताएँ स्पष्ट रूप से रखीं थी । इसके पश्चात सोमवार, 22 दिसंबर को जीडीए अधिकारी श्री विजेंद्र गुप्ता ने मौके का निरीक्षण किया और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को देखकर अभिभावकों को आश्वस्त किया कि बच्चों के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी। दिव्यांग बच्चो के अभिभावकों का रुख स्पष्ट और दृढ़ है विकास तभी स्वीकार्य है जब वह समावेशी हो। केवल मौखिक आश्वासन से दिव्यांग बच्चों के भविष्य को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। इंदिरापुरम के ये विशेष बच्चे और उनके परिवार आज शासन-प्रशासन की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं कि अधिकारी अपने वचनों पर खरे उतरेंगे।
यह समय केवल योजनाएँ बनाने का नहीं, बल्कि इस ‘विशेष’ धरोहर को व्यावसायिकता के अतिक्रमण से बचाने का है, ताकि यह सिद्ध हो सके कि उत्तर प्रदेश का प्रशासन संवेदनशील, समावेशी और न्यायप्रिय है। आईपीए के महासचिव महिपाल रावत का कहना है कि हमने प्रदेश के मुख्यमंत्री , पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान में मिजोरम के गवर्नर जनरल वीके सिंह , राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, सहित दिव्यांग बच्चो के अधिकारों की रक्षा के लिए बने विभाग को पत्र लिखकर निवेदन किया है कि इस दिव्यांग बच्चो के पार्क को बचाकर उनको उनका अधिकार दिलाया जाए हमें आशा है माननीय मुख्यमंत्री जी इन दिव्यांग बच्चो के साथ न्याय करेंगे