प्रेरणा की चिंगारी

Ghaziabad :- जीवन कभी-कभी इतना थका देता है कि मन हार मानने लगता है।
सपनों की राह धुँधली पड़ जाती है, उम्मीदों का आसमान स्याह हो जाता है।
ऐसे में लगता है — अब कुछ नहीं बदलेगा।
पर सच यही है कि अंधेरा हमेशा सूरज के आने से पहले ही सबसे घना होता है।
एक दिन, एक क्षण — बस कुछ पल के लिए
मन में कोई आवाज़ उठती है —
"नहीं, मैं रुकूँगी नहीं।"
यही होती है प्रेरणा की चिंगारी।
यह छोटी होती है, पर अगर इसे सहेजा जाए,
तो यही पूरी ज़िंदगी को नया अर्थ दे सकती है।
कभी-कभी जीवन हमें गिराता है,
ताकि हम अपनी शक्ति पहचान सकें।
मुसीबतें हमें रोकने नहीं आतीं,
बल्कि हमें सिखाने आती हैं —
कि हम जितना सोचते हैं, उससे कहीं अधिक सक्षम हैं।
लोग सोचते हैं प्रेरणा कोई बाहरी चीज़ है — किताबों, भाषणों या लोगों से मिलती है।
पर असली प्रेरणा तो हमारे अनुभवों, आँसुओं और सपनों में छिपी होती है।
जब हम खुद से ईमानदारी से कहते हैं —
"मैं बदलना चाहती हूँ" —
तभी भीतर से आग जलती है।
हर दिन नया मौका है कोई भी बीता हुआ कल हमें बाँध नहीं सकता।
हर सुबह एक नया अवसर है —
एक नया कदम, एक नई शुरुआत।
बस ज़रूरत है उस एक चिंगारी को पहचानने की,
जो कहती है — “मैं कर सकती हूँ, मैं करूँगी।”
चिंगारी को बुझने मत दो
प्रेरणा कोई बड़ा तूफ़ान नहीं होती,
वह तो बस एक नन्ही सी लौ होती है —
जो हमारे भीतर जीवन में विश्वास जगाती है।
उसे जलाए रखना, यही हमारी सबसे बड़ी साधना है।
क्योंकि जब हम खुद अपने भीतर के दीपक को जलाना सीख लेते हैं,
तो कोई अंधेरा, कोई ठोकर, कोई भय हमें रोक नहीं सकता।
“प्रेरणा की चिंगारी” हर उस व्यक्ति की कहानी है
जो गिरकर भी उठा,
टूटा फिर भी मुस्कुराया,
और कहा —
“मैं हारने नहीं आई हूँ, मैं सीखने आई हूँ।”
मंजुला शर्मा  (अरुणिमा)

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