यक़ीनन दुनिया में वही शख्स है ताज़ीम के क़ाबिल, जिस शख्स ने हालात का रुख़ मोड़ दिया है

यक़ीनन दुनिया में वही शख्स है ताज़ीम के क़ाबिल, जिस शख्स ने हालात का रुख़ मोड़ दिया है
Ghaziabad :- इस दुनिया में बहुत सारी शख्सियत पैदा हुईं मग़र कुछ लोग ऐसे भी गुज़रे हैं जिन्हें आज तक भुलाया न जा सका। जिन्होंने ज़ात, ज़बान, फ़िरक़ा और मज़हब से बलंद होकर इंसानियत की ख़िदमत की। ऐसी अज़ीम, नामवर शख्सियतों में सर सय्यद अहमद खां साहब का नाम शुमार होता है। यक़ीनन जो एक माहिरे तालीम, फ़लसफ़ी, मुहब्बे वतन, अक़्लियतों के बुनियादी समाजी, मज़हबी हुक़ूक के रहनुमा, मोअज़िज़्ज़ और मारूफ़ शख्सियत रहे उनकी यौम-ए-पैदाइश पर ख़िराज-ए-अक़ीदत।
दरअसल खां साहब हिन्दू-मुस्लिम क़ौम के अलम्बरदार और जदीद हिन्दोस्तान के अज़ीम म्यांमारों में से एक थे जिन्होंने ज़िन्दगी के हर शोबे पर असर डाला। अलीगढ़ तहरीक को एक जामेअ तहरीक बनाने वाले सर सय्यद साहब ने लोगों को जिहालत से तालीम की ओर माईल किया। बदलते हालात के साथ ख़ुद को बदलना और हुक़ूमत-ए-वक़्त के साथ बाग्याना नही बल्कि हिक़मत के पहलू इख़्तियार करना सिखाया। एक तरफ़ साइंटिफिक़ सोसायटी क़ायम करके लोगों में साइंस का रुझान बढ़ाया तो दूसरी जानिब तहज़ीब-उल-इख़लाक़ निकालकर एक ग़ाफ़िल क़ौम की इस्लाह का बेड़ा उठाया। ग़र्ज़ यह कि सर सय्यद अहमद खां साहब ने ख़ुद के लिए कुछ नही किया बल्कि अपने आपको क़ौम और मुल्क़ की ख़िदमत के लिए वक़्फ़ कर दिया। लिहाज़ा हम सबकी यह ज़िम्मेदारी बनती है कि हम उनकी ज़िंदगी को पढ़ें, समझें और अमली ज़िंदगी में जगह दें। उनके नज़रिये को आम करें, एक ऐसा हिन्दोस्तान तामीर करें जैसा वो देखना चाहते थे हम इल्म के मैदान में इतना आगे बढ़ जाएं कि आगे बढ़कर क़ौम और मुल्क़ की क़यादत को अपने हाथ में लेकर पूरी दुनिया से ज़ुल्म और सितम का ख़ात्मा कर दें और पूरी दुनिया को यह बता दें कि जो अब्र यहां से उठेगा वो सारे जहां पे बरसेगा।
          *"ज़ैनब फ़ातिमा, राष्ट्रीय सचिव"*
         *"समाजवादी अल्पसंख्यक सभा"*