मैं आज जहाँ हूँ… अपने दम पर हूँ

Ghaziabad :- मैं आज जहाँ हूँ… अपने दम पर हूँ
लोगों को मुझसे शिकायतें बहुत होंगीं।
कभी मेरे शब्दों से, कभी मेरे निर्णयों से, और कभी मेरी चुप्पी से।
पर शायद ही किसी को यह खुशी हो कि मैं आज जहाँ खड़ी हूँ, वहाँ तक अपने दम पर पहुँची हूँ —
बिना किसी के आर्थिक, मानसिक या सामाजिक सहारे के।

ज़िंदगी ने हमेशा आसान रास्ते नहीं दिए।
कभी हालात ने परखे, कभी लोगों ने, और कभी खुद ने खुद को।
हर बार जब लगा कि अब आगे बढ़ना मुश्किल है,
तब भीतर से एक आवाज़ आई “रुकना नहीं, तेरा हौसला ही तेरा सहारा है।”

कभी रिश्तों ने किनारा किया,
तो कभी समाज ने सवाल उठाए।
पर मैंने किसी से उम्मीद करना छोड़ दी —
क्योंकि उम्मीदें जब टूटती हैं, तो मन भी टूटता है।
और मैंने सीखा कि टूटे बिना भी जिया जा सकता है, बस अपने भीतर भरोसा होना चाहिए।

मैंने अपने संघर्षों को कमजोरी नहीं बनने दिया,
बल्कि उन्हें अपनी ताकत बनाया।
हर ठोकर ने सिखाया कि कोई साथ दे या न दे,
अगर विश्वास खुद पर है तो मंज़िल दूर नहीं।

आज मैं जब पीछे मुड़कर देखती हूँ,
तो अपने भीतर एक संतोष महसूस होता है।
क्योंकि मैं जानती हूँ —
मेरे हर कदम के पीछे किसी और का सहारा नहीं,
सिर्फ मेरा साहस, मेरा विश्वास और मेरी मेहनत है।

लोग चाहे जो कहें,
मैं अपने सफर पर गर्व करती हूँ।
क्योंकि मैं आज जहाँ हूँ —
अपने दम पर हूँ।
मंजुला शर्मा (अरुणिमा)

Comments