उत्तर प्रदेश सरकार कैबिनेट मंत्री माननीय विधायक श्री सुनील शर्मा, पूर्व सांसद श्री अनिल अग्रवाल, पूर्व महापौर श्रीमती आशा शर्मा, पूर्व महानगर अध्यक्ष श्री अजय शर्मा, ट्रांस हिंडन की सबसे बड़ी रामलीला लाजपत नगर में पहुंचे समिति के अध्यक्ष बिक्रम सिंह बैंसला ने किया स्वागत
साहिबाबाद।। रामलीला मैदान लाजपत नगर साहिबाबाद विधानसभा के विधायक उत्तर प्रदेश सरकार कैबिनेट मंत्री माननीय सुनील शर्मा, , पूर्व सांसद अनिल अग्रवाल, पूर्व महापौर आशा शर्मा, पूर्व महानगर अध्यक्ष अजय शर्मा, ने दीप प्रज्ज्वलित कर रामलीला मंचन का शुभारंभ किया। रामलीला में मुख्यअतिथियो का समिति के अध्यक्ष बिक्रम सिंह बैंसला, संरक्षक ईश्वर त्यागी, उपाध्यक्ष पुष्कर गुप्ता, के द्वारा शाल एवं फूल मालाओं से जोरदार स्वागत किया गया। उसके बाद रामलीला का आयोजन शुरू किया गया रामलीला में रावण के द्वारा सीता हरण के बाद जटायु मरण की लीला का मंचन किया गया। जिसको देखकर कैबिनेट मंत्री माननीय विधायक सुनील शर्मा भावविभोर हो गए उन्होंने बताया कि जटायु का दृश्य चल रहा है। हमने रामचरित्र मानस के बहुत सारे पाठ किया है। लेकिन जटायु उस योनि में उत्पन्न हुवे थे जिसको कोई सुबह-सुबह देख ले तो उसका दिन खराब हो जाए। जिसको अशुभ योनि माना जाता था गिद्ध की उस गिद्ध योनि में उत्पन्न हुए। लेकिन उस गिद्ध योनि में उत्पन्न हुवे जटायु को वह गति प्राप्त हुई जो प्रभु श्री राम के पिता राजा दशरथ को भी नहीं मिला। राजादशरथ का अंतिम संस्कार भारत जी ने किया और जब उन्होंने दुनिया को छोड़ा तो उनके पास उनका कोई भी पुत्र नहीं था। लेकिन जटायु ने जब अपने प्राण त्यागे भगवान श्री राम की गोदी में था । साक्षात परमेश्वर साथ में थे और उनका अंतिम संस्कार त्रिलोकपति प्रभु श्री राम के हाथों के द्वारा हुआ। केवल इस लिए जटायु ने जब धर्म पर आंच आई तो अपने प्राणों की आहुति देना तय किया। वो चुप नहीं बैठे जब लंकापति आदि रावण माता सीता का हरण कर के लेकर जा रहा था तो सब जानते थे की रावण से युद्ध करने का मतलब है मौत लेकिन जटायु ने कहा कि आज माता जानकी पर संकट है। नारी जाती पर संकट है, अगर गिद्धराज जटायू अगर आज तुम चुप रहे तो आने वाली पीडिया यह कहेंगे कि उन्होंने अपने प्राणों के लिए माता जानकी रक्षा नहीं कि । उसने रावण के साथ युद्ध किया और रावण को उसने पराजित भी किया लेकिन रावण ने धोखे से उसके पर काट दिए । तब खयाल कर के उसको छोड़ दिया , प्रभुश्री राम की जो अटूट भगति उसके अंदर थी उसी का परिणाम था। जब जटायु ने अपने प्राण त्यागे तो भगवान के चरणों में उनका सर था। इस घटना से यही संदेश हमे मिलता है कि नारी सम्मान में हमें अपने प्राण भी दे कर उनकी रक्षा करनी चाहिए । 30 अक्टूबर 1990 को जो करसेवकों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी वह भी जटायु की भर्ती ही थे वह जानते थे कि उस टाइम उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार जल्लाद सरकार है उसे वक्त की 1990 की समाजवादी पार्टी ने निहत्थे करसेवकों पर गोलियां चला दी थी। भजन कीर्तन करते लोगों को मार दिया गया था ल, सरयू नदी का जल खून से लाल हो गया था। लेकिन वह राम भक्त भी जटायु की भांति यह कहते थे आज अपने प्राण दे देंगे लेकिन प्रभु राम का मंदिर तो बनवा कर ही रहेंगे और आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने भव्य और इतना सुंदर राम मंदिर आपको दे दिया कि वह लाखों लोग वहा जाते है । और भगवान राम के दर्शन करते है। मुख्य अतिथियों में पार्षद सचिन डागर, पार्षद रामनिवास बंसल, पार्षद पवन रेडी, पार्षद मदन राय, कुलदीप गोस्वामी, हरीश चंद शर्मा, पूर्व पार्षद विनोद शर्मा, पुलकित शर्मा, समिति के सदस्यों के द्वारा सभी का स्वागत किया गया।